नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)
गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं (काली, तारा, बगलामुखी, त्रिपुरसुंदरी, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी, धूमावती, मातंगी, कमला और भैरवी) की साधना की जाती है। ये महाविद्याएं साधक को विशेष आध्यात्मिक शक्तियां और सिद्धियां प्रदान करती हैं।
यह समय आत्मज्ञान और ईश्वर के करीब जाने का अवसर प्रदान करता है।
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
बगलामुखी : ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्लीं ॐ स्वाहा:।
गुप्त नवरात्रि अंतिम दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें।
नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें और विचारों को पवित्र रखें।
दुर्गा सप्तशती, देवी स्तोत्र या महालक्ष्मी मंत्र का पाठ करें।
इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें।
साधक को get more info मनोवांछित सिद्धियां और फल प्राप्त होते हैं।
भुवनेश्वरी : ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
कलश में गंगाजल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल, चंदन, और दूर्वा डालें।
फिर कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा के माध्यम से उसे बांधें।